भारत में 12वीं के बाद छात्र की जिंदगी और एजुकेशन सिस्टम
आज का दौर तेज़ी से बदल रहा है, लेकिन हमारा एजुकेशन सिस्टम अब भी काफी हद तक पुराना है। बारहवीं के बाद जब एक छात्र स्कूल से बाहर निकलता है, तो उस छात्र पर तमाम ज़िम्मेदारियों और उम्मीदों का बोझ होता है।उसे समझ नहीं आता कि क्या करे - प्रवेश परीक्षा की तैयारी करे? ग्रेजुएशन? या कोई स्किल डेवलपमेंट कोर्स?
कॉलेज में एडमिशन का संघर्ष
हर छात्र के लिए कॉलेज में दाखिला पाना एक सपना होता है, लेकिन सीटें सीमित हैं और कट-ऑफ इतने हाई होते हैं कि अच्छे नंबर लाने वाले भी पीछे छूट जाते हैं। प्राइवेट कॉलेज महंगे हैं और सरकारी कॉलेज में एडमिशन मिलना मुश्किल।
करियर चुनने की उलझन
हमारे यहां अभी भी डॉक्टरी, इंजीनियरिंग, CA जैसे पारंपरिक करियर को ही बेहतर माना जाता है। क्रिएटिव फील्ड या स्किल बेस्ड करियर को लोग कम आंकते हैं। माता-पिता और समाज का दबाव छात्र को अपने सपनों से दूर कर देता है।
शिक्षा प्रणाली की खामियां
भारतीय शिक्षा प्रणाली रटने को ज़्यादा महत्व देती है। छात्रों को कौशल, व्यावहारिक ज्ञान या उद्योग की ज़रूरतों के हिसाब से तैयार नहीं किया जाता।
क्या होना चाहिए बदलाव?
- स्किल बेस्ड कोर्स को बढ़ावा देना
- काउंसलिंग को अनिवार्य बनाना
- स्टूडेंट्स को एक्सप्लोर करने का समय देना
- वैकल्पिक करियर को भी महत्व देना
निष्कर्ष
12वीं के बाद की जिंदगी एक मोड़ पर खड़ी होती है, जहां सही दिशा मिलना सबसे जरूरी है। अगर शिक्षा प्रणाली समय के साथ बदलती है, तो लाखों छात्रों को बेहतर भविष्य मिल सकता है। छात्र को खुद पर विश्वास और समाज को उसमें भरोसा रखना होगा।


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