ट्रंप ने भारत पर टैरिफ 28% से घटाकर 25% क्यों किया?|असली सच और असर
Introduction
भारत और अमेरिका के बीच व्यापारिक संबंध लंबे समय से उतार-चढ़ाव भरे रहे हैं। लेकिन जब डोनाल्ड ट्रंप अमेरिका के राष्ट्रपति थे, तो उन्होंने कुछ सख्त फैसले लिए जिनमें से एक था भारत के कुछ प्रोडक्ट्स पर टैरिफ (import duty) बढ़ाना। पहले 28% था, फिर कुछ मामलों में इसे 25% कर दिया गया। पर इसके पीछे असली वजह क्या थी, और इसका असर भारत पर क्या पड़ा?
टैरिफ कम करने का क्या कारण था?
जब ट्रंप सरकार ने 28% ड्यूटी लगाई थी, तब उनका मकसद अमेरिका के ट्रेड घाटे को कम करना था। यानी जो सामान अमेरिका भारत से मंगवाता है, उसकी कीमत कम हो और अमेरिका की इकॉनॉमी को फायदा हो।
लेकिन ज़्यादा टैरिफ से भारत-अमेरिका के संबंध बिगड़ने लगे और अमेरिका को ये डर था कि कहीं चीन की तरह भारत भी जवाबी टैरिफ ना लगा दे। इसी दबाव में कई प्रोडक्ट्स पर टैरिफ 28% से घटाकर 25% कर दी गई।
भारत को क्या नुकसान हुआ?
- भारतीय exporters को नुकसान हुआ, क्योंकि उनके प्रोडक्ट्स की कीमत अमेरिका में ज़्यादा हो गई।
- कंज़्यूमर्स को भी अमेरिका में महंगे दामों पर सामान मिला।
- टेक्सटाइल और ऑटो पार्ट्स जैसे सेक्टर सबसे ज़्यादा प्रभावित हुए।
इसका क्या लाभ हुआ?
- कुछ सेक्टर जैसे फार्मा और आईटी पर असर नहीं पड़ा, बल्कि उनका एक्सपोर्ट बढ़ा।
- टैरिफ घटने के बाद अमेरिका से बातचीत आसान हुई और फ्यूचर ट्रेड डील्स के रास्ते खुले।
- भारत को एक सीख मिली कि उसे डायवर्सिफिकेशन करना होगा — यानी सिर्फ एक देश पर निर्भर नहीं रहना चाहिए।
निष्कर्ष
टैरिफ कोई टैक्स नहीं बल्कि एक हथियार है जो देश अपनी इकोनॉमी को बचाने या दबाव बनाने के लिए इस्तेमाल करते हैं। ट्रंप ने जो टैरिफ लगाया और फिर थोड़ा कम किया, वो सिर्फ बिजनेस नहीं था — वो एक पॉलिटिकल चाल भी थी। भारत को ऐसे समय में अपने एक्सपोर्टर्स की मदद करनी चाहिए और लॉन्ग टर्म में स्वदेशी उत्पादन बढ़ाना चाहिए।


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